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पुरस्कार में चड्डी/ नीरज दइया
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हमारे समय की सबसे बड़ी सांस्कृतिक उपलब्धि यह है कि अब पुरस्कार मान-सम्मान
नहीं, वे सिर्फ एक दैनिक, मासिक, त्रैमासिक पहचान-पत्र बन चुके हैं।
पहचान-पत्र भी...
1 हफ़्ते पहले




2 टिप्पणियाँ:
लाजवाब कार्यक्रम...बाउजी कमाल कर दित्ता तुसी...तिन चार वारि सुन लय है हाली होर सुनन दा मन है...
waah ji waah bahut khub...
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