ऑडियो सुनने के लिए यहाँ प्ले करें
तीन रातें और चार दिन की ज़िंदगी
-
एक शहर में दो अजनबी लोगों की थोड़ी फ़्लैशबैक और अधिक वर्तमान में बीती तीन
रातें और चार दिन की ज़िंदगी संपन्न हुई। कहानी में तनाव नहीं था। कहानी में
प्रेम...
1 हफ़्ते पहले



2 टिप्पणियाँ:
भाई साहब बहुत शानदार है । मेरी बधाई स्वीकारें ।
ADARNIY AALOK JI;
NAMASTAY;
EK ARSE BAAD AAPKO DEKHKAR KHUSHI HUI.
BAHUT SAAL HO GAYE MILE BINA.RAJESH JI MULAKAT KARWANIE K LIYE DHANYAWAD.
एक टिप्पणी भेजें